कांग्रेस का चेहरा: केरल में मुख्यमंत्री की घंटी अब टूटी या इंतजार जारी?

कांग्रेस का चेहरा: केरल में मुख्यमंत्री की घंटी अब टूटी या इंतजार जारी?

परिवार, समर्थक और प्रदेश की राजनीति—सब एक साथ हलचल में थे। बुधवार को वढ़ते-घमंड और बेचैनी के बीच कांग्रेस हाई-कमांड ने एक बार फिर कहा कि केरल के नए मुख्यमंत्री का नाम गुरुवार (14 मई) को घोषित किया जाएगा। यह घोषणा उन दस दिनों के बाद आई है जब विधानसभा चुनाव के परिणाम आए थे और यूडीएफ ने बड़े बहुमत से जीत हासिल की थी।

क्या हुआ

कांग्रेस के आलाकमान ने कहा है कि चर्चा पूरी हो चुकी है और AICC जल्द ही मुख्यमंत्री पिक का ऐलान करेगा। पार्टी महासचिव जयराम रमैश ने दिल्ली में राहुल गांधी और पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की बैठक के बाद यह संकेत दिया। उसी दिन केरल कांग्रेस के विधायक-इलेक्ट्स को KPCC मुख्यालय पर दोपहर को बुलाया गया है ताकि legislature party की बैठक में नेता चुना जा सके।

इस पृष्ठभूमि में केरल की सड़कों और नेताओं के घरों के बाहर उत्साहित व समर्थक भीड़ नजर आई—वहीं सहयोगी दलों में असंतोष की भी सूचना है।

दावेदार कौन-कौन हैं

मुख्यमंत्री की दौड़ में प्रमुख नाम हैं:
  • K.C. Venugopal — AICC के संगठन महासचिव, कई विधायकों का समर्थन।
  • V.D. Satheesan — पूर्व विपक्षी नेता, पार्टी के कार्यकर्ताओँ और कुछ सहयोगियों जैसे IUML का समर्थन।
  • Ramesh Chennithala — पार्टी के वरिष्ठ नेता और अनुभव वाले प्रत्याशी।

रिपोर्टों के मुताबिक के.सी. वेणुगोपाल के पास अधिकतर चुने हुए कांग्रेस विधायकों का समर्थन है, जबकि सतरीशान की पृष्ठभूमि और जमीनी समर्थन के साथ IUML व केरल कांग्रेस (जोसफ) जैसे सहयोगियों की सहानुभूति भी है। घटनास्थल से मिली खबरों में कहा गया कि वायनाड में राहुल गांधी को चेतावनी भरे पोस्टर भी लगाए गए — यह संकेत है कि निर्णय पर स्थानीय स्तर पर रोष भी था।

गठबंधन दबाव और सहयोगी असंतोष

यूडीएफ ने कुल 140 में से 102 सीटें जीतीं; IUML के पास लगभग 22 सीटें हैं और केरल कांग्रेस (जोसफ) के सात विधायक हैं। इन सहियोगियों ने साफ कहा है कि मुख्यमंत्री का चयन अक्सर कांग्रेस का अंदरूनी मामला माना जाता है, पर लंबे इंतजार से चिंता बढ़ी है। IUML के नेतृत्व ने देर करने पर चिंता जताई और कहा कि अनिश्चितता राजनीतिक रूप से महंगी पड़ सकती है। वहीं केरल कांग्रेस (ज) ने दो मंत्रालयों का दावा किया है।

कुछ गठबंधन दलों और स्थानीय नेताओं ने यह भी कहा कि किसी प्रकार का हस्तक्षेप या खुले प्रभाव-प्रयास निर्णय प्रक्रिया को लंबा कर रहा है। इस आरोप का खंडन भी हुआ है—कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का कहना रहा कि यह एक व्यवस्थित, लोकतांत्रिक प्रक्रिया है और सभी आवाज़ों को सुना गया।

प्रक्रिया, समय और तर्क

कांग्रेस CLP (Legislature Party) ने पहले हाई-कमांड को निर्णय करने का अधिकार दिया था। अब वही हाई-कमांड अंतिम निर्णय के साथ सामने आने वाला है। कांग्रेस के नेताओं ने बार-बार कहा कि राहुल गांधी सक्रिय भूमिका में रहे और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ बैठकें कर ली गईं। जयराम रमैश ने संकेत दिया कि अब डिस्कशन पूरी हो चुकी है और घोषणा जल्द होगी।

कुछ स्थानीय नेताओं ने कहा कि समय-सरणी में देरी वैसी भी संवैधानिक समस्या नहीं है — उदाहरण के तौर पर चंडी ऊommen ने याद दिलाया कि संविधान के अनुसार शपथ लेने का आखिरी समय 23 मई तक मौजूद है। हर मामले में, पार्टी चाहती है कि निर्णय ऐसा हो जो सहमति दे और किसी बड़े विवाद को जन्म न दे।

एक अलग परिप्रेक्ष्य में AICC मैनेजर अजयmaken (Ajay Maken) ने सोशल मीडिया पर बताया कि ऐतिहासिक रूप से कांग्रेस मुख्यमंत्री चयन में तेज रही है—उनके आंकड़ों के अनुसार कांग्रेस ने औसतन 5 दिन लिए जबकि BJP ने 7.2 दिन। यह तर्क देरी के आलोचनों का जवाब देने के तौर पर उठाया जा रहा है।

आगे क्या होगा

दोपहर की CLP बैठक में विधायक नेता चुने जाएंगे; उसके बाद चुने हुए नेता से राज्यपाल को अर्जी दी जाएगी और शपथ प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अगर हाई-कमांड का चुना हुआ उम्मीदवार गठबंधन के सहयोगियों के साथ संतुलन बनाता है तो सरकार जल्दी ही शपथ ले सकती है। पर अगर सहयोगियों की नाराजगी बनी रही, तो उसकी राजनीतिक कीमत कांग्रेस को भविष्य में चुकानी पड़ सकती है।

अंततः यह फैसला केवल एक नाम भर नहीं होगा—यह केरल में अगले पांच साल की सरकार की दिशा, मंत्रिमंडल के संतुलन और यूडीएफ के भीतर शक्ति-संतुलन को भी तय करेगा। आज दोपहर भाजपा और विपक्ष भी इसी मसले पर हमला या प्रतिक्रियाएँ देंगी, पर असली नतीजा CLP के कक्ष में ही तय होगा।

(रिपोर्ट में उन तथ्य-सूत्रों का समावेश किया गया है जो पार्टी के बयानों, प्रदेश नेताओं की प्रतिक्रियाओं और पत्रकार रिपोर्टिंग पर आधारित हैं।)

केरलकांग्रेसमुख्यमंत्रीUDFचुनाव

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